उत्पत्ति (1970 के दशक के अंत – 1980 के दशक की शुरुआत)
C++ भाषा का विकास Bjarne Stroustrup ने Bell Laboratories में किया।वे बड़े सिस्टम सॉफ़्टवेयर पर काम कर रहे थे और चाहते थे कि C भाषा की तेज़ गति और हार्डवेयर के निकट नियंत्रण को Simula जैसी भाषाओं की ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेड विशेषताओं के साथ जोड़ा जाए।
1979 में उन्होंने C भाषा को विस्तारित करना शुरू किया। इस प्रारंभिक संस्करण को “C with Classes” कहा गया, जिसमें निम्न विशेषताएँ शामिल थीं:
- क्लास (Classes)
- ऑब्जेक्ट्स (Objects)
- डेटा एब्स्ट्रैक्शन (Data Abstraction)
- मूल इनकैप्सुलेशन (Basic Encapsulation)
नामकरण और प्रारंभिक विकास (1983)
1983 में C with Classes का नाम बदलकर C++ रखा गया।इस नाम की प्रेरणा C भाषा के increment ऑपरेटर (++) से ली गई, जिसका अर्थ है “C से बेहतर”।
इस चरण में C++ में कई नई विशेषताएँ जोड़ी गईं:
- कन्स्ट्रक्टर और डिस्ट्रक्टर
- फ़ंक्शन ओवरलोडिंग
- वर्चुअल फ़ंक्शन
- इनहेरिटेंस
C++ को C के साथ backward compatible रखा गया, जिससे C के प्रोग्रामर इसे आसानी से अपना सके और इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी।
मानकीकरण का दौर (Standardization Era)
जैसे-जैसे C++ लोकप्रिय होती गई, विभिन्न कंपाइलरों में इसके व्यवहार में अंतर आने लगा। इस समस्या को हल करने के लिए इसका औपचारिक मानकीकरण शुरू किया गया।
प्रमुख माइलस्टोन:
- 1998 – C++98: पहला ISO मानक
- 2003 – C++03: छोटे सुधार और स्पष्टीकरण
- 2011 – C++11: बड़ा अपडेट (auto, lambda, smart pointers, threading)
- 2014 – C++14: सुधार और प्रदर्शन में वृद्धि
- 2017 – C++17: सरल सिंटैक्स और स्टैंडर्ड लाइब्रेरी में सुधार
- 2020 – C++20: concepts, ranges, coroutines, modules
- 2023 – C++23: क्रमिक सुधार और लाइब्रेरी विस्तार
C++ लोकप्रिय क्यों हुई
C++ सफल हुई क्योंकि यह:
- उच्च प्रदर्शन और उच्च-स्तरीय एब्स्ट्रैक्शन का संयोजन प्रदान करती है
- प्रोसीजरल, ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेड और जेनरिक प्रोग्रामिंग को सपोर्ट करती है
- सिस्टम सॉफ़्टवेयर और बड़े अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त है
आधुनिक महत्व
आज C++ का व्यापक उपयोग किया जाता है:
- ऑपरेटिंग सिस्टम में
- गेम इंजन में
- कंपाइलर बनाने में
- एम्बेडेड सिस्टम में
- हाई-परफ़ॉर्मेंस और रियल-टाइम एप्लिकेशन में